Friday, October 3, 2014

तू स्वतंत्र है

कहाँ गए वो वीर बहादुर जो अंग्रेज़ों से डटकर झूझे थे
और कहाँ गए वो लाल सपूत जो हर जंग में कूदे थे

क्या सारा उत्साह ठण्डाया है, और वही जोश पिघलाया है
क्यों दुर्व्यवहार पर भृकुटि तनती नहीं बस शर्म से सर झुकाया है

क्या संचारित नहीं होता अब गरम रक्त
क्यों बैठे हैं सब हम यूँ विरक्त

क्यों आँख के अंधे नयनसुख और कान के बहरे श्रवणकुमार हम
क्यों उसको दुर्बल, अबला और बेचारगी के नाम से जानें आज हम

क्यों पैदा होते ही बेटी पर लक्ष्मी की मुहर लगाते हो
पर फिर भी उसके पढ़ने से पहले उसके ब्याह की बाट जुहाते हो

क्यों किताबें - खिलोने छीन हाथ में करछी और कढ़ाई है
क्यों उसके सपनों के रंगो में यूँ सिन्दूरी रंग की स्याही है

वह रानी झाँसी की या दुर्गा बस मिसाल की ही तरह क्यों नज़र आई है
सति, अहिल्या और बन सीता क्यों हर दम अग्निपरीक्षाएं दिलवाई हैं

बस जलाने तेरे घर का चिराग
वो करे हर सपने का परित्याग

क्यों विवाह करना जैसे पूनःजन्म हो, उसकी पहचान को मिटाता है
माँ की कोख से जनम ले फिर भी संतान के नाम के आगे बस पिता का नाम जुड़ जाता है

क्यों भारत की गरिमा दहेज़ की आग में झुलसती और खुलेआम यूँ बेआबरू लटकी है
शर्मसार हो रही भारत की सभ्यता दानवता के मार्ग पर क्यों जा भटकी है

आओ मिलकर करें हम एक फैसला
दे उसे मान और स्वछन्द विहार का पूर्ण हौसला

वह महज लावण्य का प्रतीक न हो , वह तेजस्वी हो , विदूषी हो
वह महज पुरुषों के कामयाबी के पीछे नहीं उनकी हर जीत में समावेशी हो

वो किसी पर बोझ न हो , उसका जीवन भी यथार्थ हो
वह कोई दया का पात्र न हो , वो सक्षम हो , समर्थ हो

उठो भारत के नौजवानो हमें हिन्द की हर बेटी को बचाना है
हर घर की बेटी को कर सुखी, हमें भारत माँ को हँसाना है

और रहे हम तब तक प्रयत्नरत जब सूर्यास्त से न डरे कोई बेटी
और उसके माता-पिता ये न सोचे वो अबतक घर पर क्यों न लौटी

अब सहम न..... उठ खड़ी हो , पैरों की बेड़ी खोल और चुप्पी का ताला तोड़
जा विचर कर नील गगन में और बादलों से रिश्ता जोड़ .......

ऐसा रिश्ता जोड़ जैसे पिंजरे से छूटे हुआ कोई कैद परिंदा
और तेरी चहक की गूँज सुन कैद करने वाला भी हो शर्मिंदा … कैद करने वाला भी हो शर्मिंदा …… !!

3 comments:

  1. Very nice poem...One of your best poem which I have read....

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  2. Thought provoking! `Veer Ras` ki jhalak hai for the first time, I think!! :)

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