जैसे कलियों में छिपा है फूलों के महकने का अंदाज़,
जैसे नन्हे परों के ही बीच छिपा है चहकने का अंदाज़,
जैसे अंकुरों में हो कैद उस पेड़ के फलने फूलने का राज़,
जैसे सुबह कि पहली किरण को है अँधेरा भगाने पर नाज़,
जैसे हर किलकारी में गूंजता है मोहक हंसी के गीतों का साज,
जैसे उस अदनी सी बूँद को मिला है घट भरने का काज,
बस उसी तरह इन तस्वीरों को सजायेंगे कुछ चंद अलफ़ाज़
हमारी इस अदनी सी कोशिश से करते हैं हम इस संकलन का आगाज़ !!
जैसे नन्हे परों के ही बीच छिपा है चहकने का अंदाज़,
जैसे अंकुरों में हो कैद उस पेड़ के फलने फूलने का राज़,
जैसे सुबह कि पहली किरण को है अँधेरा भगाने पर नाज़,
जैसे हर किलकारी में गूंजता है मोहक हंसी के गीतों का साज,
जैसे उस अदनी सी बूँद को मिला है घट भरने का काज,
बस उसी तरह इन तस्वीरों को सजायेंगे कुछ चंद अलफ़ाज़
हमारी इस अदनी सी कोशिश से करते हैं हम इस संकलन का आगाज़ !!
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