कल मैं पूरे बारह बरस की हो जाऊँगी।
कल से मैं भी दीदी की तरह सायानी कहलाऊँगी।
अम्मा इसी दिन के इंतज़ार में थी
बाबा न जाने क्योँ दिखते हैं दुखी !
खेत पर जाना तो है उनको
पर बेर बेर खोलके देखते हैं सन्दूकी।
बाबा कहते हैं मुझे अबसे पाठशाला नहीं जाना पड़ेगा
पर माट साहब तो कहे थे गणित न दिखाए कल तो डंडा पड़ेगा
सोचा निम्मी के हाथ से कापी भिजवा दूँगी जब खेलने जाऊँगी
पर अम्मा कहती हैं वो संजा बखत में मुझे दाल चावल बनाना सिखाएंगी
बाबा ने मेरे जनमदिन पे दो दो साड़ियां लाई हैं
अम्मा ने तेल लगा के कस के चुटिया बनाई है
अम्मा-बाबा कहते हैं मेरे लिए उन्होने एक रिश्ता किया है मंजूर
अगले महीने बिया है मेरा, आइएगा जरूर ……
Nice......
ReplyDeleteBaar Baar ise padhne chala aata hu main.
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