Tuesday, November 27, 2012

शिक्षा

हमने बचपन की शुरुवात से ही उसे हर चीज़ में अंतर समझना था सिखा दिया।
हर काला सफ़ेद से अलग है, ये रंगों का भेद उसे दिखा दिया ।
हर अंक के मायने एक दूजे से अलग हैं, ये ज्ञान भी उसे रटा दिया ।
हर छोटा बड़े से अलग होता है, ये रचनाओं का भेद भी उसे बता दिया ।
पता नहीं कौन मूर्ख कहता है कि शिक्षा सबको समान  करती है
कल उसने जब इंसानों के बीच भेद किया तो हमने उसपर साम्प्रदायिकता का ठप्पा लगा दिया .... 

8 comments:

  1. Awesome Priyanka... I wish we all could think the way you do...

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  2. एक नया अंदाज़ शिक्षा को देखने का!! बहुत ही ख़ूबसूरती से ज्ञान के गलत इस्तेमाल को उजगार किया है!! :)

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  3. Very nice...really this poem reflects the irony of circumstances in society.....any way classification is in root of all education (शिक्षा)....Very nice way to connect.

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