एक रोज़ आकाश के सारे सितारे हो गए दंग
सूरज और चाँद में छिड़ गयी कुछ अजब सी जंग
कौन ज्यादा अनोखा है और किसके निराले हैं अंदाज
वही पहनेगा आज खूबसूरती का ये ताज
पृथ्वी माता पहुंची दोनों को लड़ने से रोक, बढ़ाने उनका हौसला
तो फसी ऐसी मध्यस्त कि निर्णायक बनकर करना पड़ा इन्हीको फैसला
पृथ्वी के सामने ये समस्या थी बड़ी जटिल
दोनों पक्षों ने पेश करना शुरू की अपनी अपनी दलील
दिन की शुरुवात मुझसे ही होती है, हूँ में ऊर्जा देने में दक्ष
मेरे बिन न जीवन होगा, कह सूरज ने रखा अपना पक्ष
बोला सूरज न होता मैं तो ये पौधे युहीं भूखे मर जाते
बिन मेरे तो ये बादल भी पानी नहीं बरसाते
हो तुम क्रोध के प्रतीक, तुम ही पृथ्वी के जीवों को हो झुलसाते
न होता मैं चाँद इतना सुन्दर तो मुझपर इतने गीत न लिखे जाते
ये सुन जब सूरज आग बबूला हुआ और न पाया अपना गुस्सा संभाल
तभी पृथ्वी बनकर आ गई चाँद सूरज के बीच में बनकर एक ढाल
इसी तरह सूरज के क्रोध से पृथ्वी ने चाँद को बार बार है बचाया
आकाश के इसी नज़ारे को हमलोगों ने 'चंद्रग्रहण' है कहलाया