प्यार है मुझे तुम्हारे गुस्से से, झुंझलाहट से,
तुम्हे चौंका देने वाली उस रेल गाड़ी की आहट से..
प्यार है मुझे तुम्हारे आँखों के आंसुओं से,
माथे से टपकती हुई उन पसीने की बूंदों से..
तुम्हारे केशों में सजते हुए उस रूपल ताज से,
तुम्हारी वक़्त बेवक़्त की खांसी में छिपे हुए साज़ से...
प्यार है मुझे तुम्हारे डर से, तुम्हारी चिंता से , तकरार से,
मुझसे खुल के बेहिचक किए गए उस इनकार से..
प्यार है मुझे तुम्हारी माथे पर पड़ती सिलवटों से,
रात - बेरात तुम्हारी उन बेचैन करवटों से..
है प्यार मुझे तुम्हारी हर उस कमी से जो तुम्हें 'तुम' बनाती हैं
क्यूंकि तुम्हारे होने से ही ये मुझे 'हम' बनाती हैं।
तुम्हे चौंका देने वाली उस रेल गाड़ी की आहट से..
प्यार है मुझे तुम्हारे आँखों के आंसुओं से,
माथे से टपकती हुई उन पसीने की बूंदों से..
तुम्हारे केशों में सजते हुए उस रूपल ताज से,
तुम्हारी वक़्त बेवक़्त की खांसी में छिपे हुए साज़ से...
प्यार है मुझे तुम्हारे डर से, तुम्हारी चिंता से , तकरार से,
मुझसे खुल के बेहिचक किए गए उस इनकार से..
प्यार है मुझे तुम्हारी माथे पर पड़ती सिलवटों से,
रात - बेरात तुम्हारी उन बेचैन करवटों से..
है प्यार मुझे तुम्हारी हर उस कमी से जो तुम्हें 'तुम' बनाती हैं
क्यूंकि तुम्हारे होने से ही ये मुझे 'हम' बनाती हैं।