वैसे तो वे किस्मत के बड़े धनी थे,
अखबार में मचाते हर रोज़ सनसनी थे.
कॉलेज में मन लगाकर जो सीखा था कायदा,
लगता है पूरे शहर में सबसे ज्यादा इन्हें ही हुआ था फायदा.
बड़ा सा बंगला और उसके सामने चौड़ा सा अहाता
एक से एक बढ़िया गाड़ियों का लगा रहता था ताँता
कानून के दांव पेंच में ऐसे माहिर कि जब भी देते थे दलील
सामने वाले की छुट्टी हो जाये, ऐसे मशहूर थे ये वकील.
एक दिन एक बूढा रोज़मर्रा के काम से अपने घर से क्या निकला,
किसी मनचले की गाड़ी ने बिचारे को जा कुचला.
अब इस मनचले पर समस्या कुछ भारी थी,
अगले ही महीने तो इसपर चुनाव की ज़िम्मेदारी थी.
अब इस समस्या कि घड़ी में किसका दरवाजा खटखटाए
अरे शहर के इन नामी वकील से बेहतर क्या होगा कोई उपाय
और इनकी किताब में तो पहले से ही दर्ज था-
जिसकी बड़ी आय,
उसीको मिलेगा न्याय!!
तो फिर केस की सुनवाई जो शुरू हुई तो सरकारी वकील की भी गल न पाई दाल
वकील साहब ने ऐसे दांव पेंच खेले कि कोर्ट में आ गया भूचाल
अंत में साबित कर दिया कि ये तो था एक्सिडेंट का केस
बूढ़े को बना दिया अँधा, मिट ही गया क्लेश
केस की जीत से वकील साहब की थम नहीं रही थी मुस्कान
तभी भीड़ में से निकलकर आया एक व्यक्ति अनजान
बोला 'जीते जी तो तू उसे दे न पाया कोई सुकून
उस दिन उस गाडी के नीचे हुआ था तेरे ही बाप का खून
यूँ तो वो उसी दिन मर गया था जब तू उसे छोड़कर था आया
आज तूने सही मायने में उसे दफनाकर अपने बेटे होने का फ़र्ज़ है निभाया !!!'