बारिशें तब भी होती थीं , बारिशें अब भी होती हैं
पर इनमे दिखता है बस थोड़ा सा अंतर
तब भीगता था धरती का हर कोना
अब बस मेरी पलकें हो जाती हैं तर
रातें तब भी सूरज के ढलने से होती थीं, रातें होतीं है जैसे अब
पर इनमे दिखता है बस थोडा सा अंतर
तब पलक झपकाते ही सुबह होती थी
अब ये कुछ लम्बी हो गयीं है, पाती नहीं गुज़र
होली तब भी तो खेलते थे, होली अब भी खेलते हैं
पर इनमे दिखता है बस थोडा सा अंतर
तब हर रंग का बराबर योगदान होता था सजाने में
अब तो बस लाल का ही दिखता है असर
दिवाली तब भी होती थी और दिवाली अब भी होती है
पर इनमे दिखता है बस थोडा सा अंतर
तब हर घर में पटाखे- बम जलते थे
अब इन बमों से जलते हैं घर !!